आ रहा है साल नया
उम्मीद नया नया सा
यादे पुरानी सब समेटे
चल पड़े लिकने कहानी नया सा
मनाते है सब नये साल की जश्न
पुराने को करते हे विदा
मनाएँगे हम जश्न पुराने का बी
कुछ यादो को ना हम कर सकते जुदा
माफी मिले हर पुरानी गलती का
आपसे रहेगी ये उम्मीद
सिलसिला ये बनी रहे साल नये मैं बी
होगी ना गलती हम से ऐसी रखे ना उम्मीद
बर जाए साल आपका खुशियो से
दुआ हमारा रहेगा आपके साथ मे
रुकवटे ना आए आपके किसी सपनो मे
चलिए स्वागत करते है साल नया साथ मे...
Monday, 31 December 2018
Wednesday, 22 November 2017
Posted by Manjuprasad on 23:47 with 3 comments
I really
appreciate everything that you did
Helping me
whenever I need it
I’m glad someone like you
Could help me get through it
Kind is
your Heart
Offering
so much in life
Beautiful
is your mind
Helping
others in life.
Too much
of bugging if I have
Hurt if I
have you any day
Too much
of trouble if I have been
Let this
poem be an apology
So much
time you gave up
Silly queries
of mine for
Cuz of which
learnings I have many
And a lot
more to thank you for
Though
better than the rest
Words may
be too simple an appreciation
With...
Tuesday, 8 August 2017
Posted by Manjuprasad on 22:55 with No comments
The person laughing
Why assumed to be happy
People around keep going
Not knowing the reality
Emotions are not just reflected
On the face they see
Hidden are thousands
That no eyes can see
Every word people utter
Is taken differently
They might have meant something
And others understanding it differently
Lines are drawn
Separating the space
I am comfortable here
You be in other
When drawn a harsh line like that
Reevaluating the choices seems right
Better be in our limits
Then going to a place not right
World...
Thursday, 15 June 2017
Posted by Manjuprasad on 21:24 with No comments
जब एक दरवाज़ा होगी बंद
खुलते है अनेक
4 साल की engineering कतम
अब मिली है नौकरि एक
नया सा माहौल है
नयी ये ज़िन्दगी
बदलाव तो होती रहते है
यही तो है ज़िन्दगी
घर से दूर , घरवालो से दूर
अबतो phone पे होगी उनसे बात
सिर्फ छुट्टियों में मिलने जा सकते है इतने दूर
क्या चाहिए ऐसी ज़िन्दगी ?
फिर जब सोचता हूँ
तो याद आती है एक बात
कुछ पाने केलिए कुछ कोना पड़ता है
कमाने केलिए घर तो छोड़ना पड़ता है
मिले है अच्छे लोग यहाँ
दोस्त पुराने , नये
नयी सफर की नैया में
आये है साथ चलने
पुराने दोस्तो को न बुलते हुये
नये को समेटते हुए
बढ़ना...
Wednesday, 28 September 2016
Wednesday, 17 August 2016
Friday, 3 June 2016
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